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कब किस बात से इंसान बदल जाए

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एक लड़का एक लड़की एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे 💑 लड़का का नाम आलोक था और लड़की का नाम शिवानी .. दोनों शादी भी करना चाहते थे।* *दोनों ने अपने घर में बात की दोनो के घर वाले तैयार हो गए शादी भी हो गई दोनों ही बहुत खुश थे उनके घर वाले भी बहुत खुश थे।*   *लेकिन शिवानी और उसकी सास में बिल्कुल भी नहीं बनती रोज कुछ ना कुछ झगड़ा या कोई बात हो ही जाती पहले तो इन बातों को आलोक  इग्नोर करता रहा ।*  *लेकिन आलोक बहुत परेशान होता रोज रोज झगड़ा देख कर उसे और भी परेशानियां थीं।*  *ऑफिस जाता काम में उसका मन नहीं लगता वह अपनी पत्नी और अपनी मां के बारे में ही सोचता रहता कि किसी तरह झगड़ा बंद हो लेकिन ऐसा नहीं होता रोज झगड़ा होता तभी उसने फैसला किया उसने अपनी फैमिली से अलग रहने का... उसकी पत्नी यह जानकर पहले तो बहुत खुश हुई*    .*,,,, लेकिन बाद में ....* *सोचने लगी क्या यह ठीक रहेगा हम अलग रहेंगे ...पहले अपना घर छोड़ आई और अब ससुराल भी छोड़ दूं। मैंने अपने मां-बाप छोड़े क्या इनके भी छुड़ा दूं ।  क्योंकि उसका पति भी मन ही मन अपनी फैमिली को नहीं छोड़ना चाहता था...

कब किस बात से इंसान बदल जाए

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एक लड़का एक लड़की एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे 💑 लड़का का नाम आलोक था और लड़की का नाम शिवानी .. दोनों शादी भी करना चाहते थे।* *दोनों ने अपने घर में बात की दोनो के घर वाले तैयार हो गए शादी भी हो गई दोनों ही बहुत खुश थे उनके घर वाले भी बहुत खुश थे।*   *लेकिन शिवानी और उसकी सास में बिल्कुल भी नहीं बनती रोज कुछ ना कुछ झगड़ा या कोई बात हो ही जाती पहले तो इन बातों को आलोक  इग्नोर करता रहा ।*  *लेकिन आलोक बहुत परेशान होता रोज रोज झगड़ा देख कर उसे और भी परेशानियां थीं।*  *ऑफिस जाता काम में उसका मन नहीं लगता वह अपनी पत्नी और अपनी मां के बारे में ही सोचता रहता कि किसी तरह झगड़ा बंद हो लेकिन ऐसा नहीं होता रोज झगड़ा होता तभी उसने फैसला किया उसने अपनी फैमिली से अलग रहने का... उसकी पत्नी यह जानकर पहले तो बहुत खुश हुई*    .*,,,, लेकिन बाद में ....* *सोचने लगी क्या यह ठीक रहेगा हम अलग रहेंगे ...पहले अपना घर छोड़ आई और अब ससुराल भी छोड़ दूं। मैंने अपने मां-बाप छोड़े क्या इनके भी छुड़ा दूं ।  क्योंकि उसका पति भी मन ही मन अपनी फैमिली को नहीं छोड़ना चाहता था...

क्रोध पर नियंत्रण*

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  एक पिता ने अपने गुस्सैल बेटे से तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा, "तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !" बेटे को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करता रहा। धीरे-धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठोंकने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई। एक दिन ऐसा भी आया कि बेटे ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी। उसने खुशी-खुशी यह बात अपने पिता को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, "जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुए, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।" बेटा ऐसा ही करने लगा, एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी-खुशी यह बात अपने पिता को बताई। पिता उस लड़के को बाड़े में लेकर गए और कीलों के छेद दिखाते हुए पूछा, "क्या तुम ये छेद भर सकते हो?" बेटे ने कहा, "नहीं पिताजी!" पिता ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा... अब समझे बेटा, क्रोध में तुम्हारे...

*"एक मन, एक मत हो तो....* *प्रेरणात्मक कहानी*

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 *पिछली रात बड़ी बेचैनी से कटी....बमुश्किल सुबह एक रोटी खाकर घर से अपनी दुकान के लिए निकला.....* *आज किसी के पेट पर पहली बार लात मारने जा रहा हूं ,, ये बात अंदर ही अंदर कचोट रही थी....* *जिंदगी में यही फ़लसफ़ा रहा है मेरा कि ....* *अपने आस पास किसी को रोटी के लिए तरसना ना पड़े..... पर इस विकट समय मे अपने पेट पर ही आन पड़ी है...* *दो साल पहले ही अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर कपड़े का शोरूम खोला था ,, मगर दुकान के सामान की बिक्री, अब आधी हो गई थी ,, अपनी ही कपड़े की दुकान मे दो लड़के और दो लड़कियों को रखा है मैंने ग्राहकों को कपड़े दिखाने के लिए...* *लेडीज डिपार्टमेंट की दोनों लड़कियों को निकाल नहीं सकता...*  *एक तो कपड़ो की बिक्री उन्हीं की ज्यादा है। दूसरे वो दोनों बहुत गरीब है ,, दो लड़कों में से एक पुराना है, और वो घर में इकलौता कमाने वाला है,, जो नया वाला लड़का है दीपक....* *मैंने विचार उसी पर किया है,, शायद उसका एक भाई भी है, जो अच्छी जगह नौकरी करता है और वो खुद, तेजतर्रार और हँसमुख भी है, उसे कहीं और भी काम मिल सकता है...*  *पिछले सात महीनों मे....मैं बिलकुल टूट चुका हूं, स्थिति को द...

*चंदन और पलाश*की कहानी

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  सतपुड़ा के वन प्रांत में अनेक प्रकार के वृक्ष में दो वृक्ष सन्निकट थे। एक सरल-सीधा चंदन का वृक्ष था दूसरा टेढ़ा-मेढ़ा पलाश का वृक्ष था। पलाश पर फूल थे। उसकी शोभा से वन भी सुशोभित था।*   *चंदन का स्वभाव अपनी आकृति के अनुसार सरल तथा पलाश का स्वभाव अपनी आकृति के अनुसार वक्र और कुटिल था, पर थे दोनों पड़ोसी व मित्र। यद्यपि दोनों भिन्न स्वभाव के थे। परंतु दोनों का जन्म एक ही स्थान पर साथ ही साथ हुआ था। अत: दोनों सखा थे।*   *कुलाड़ी लेकर एक बार लकड़हारे वन में घुस आए। चंदन का वृक्ष सहम गया। पलाश उसे भयभीत करते हुए बोला-* *याद रखो 'सीधे वृक्ष को काट दिया जाता है। ज्यादा सीधे व सरल रहने का जमाना नहीं है। टेढ़ी उँगली से घी निकलता है। देखो सरलता से तुम्हारे ऊपर संकट आ गया। मुझसे सब दूर ही रहते हैं।'*   *चंदन का वृक्ष धीरे से बोला- 'भाई संसार में जन्म लेने वाले सभी का अंतिम समय आता ही है। परंतु दुख है कि तुमसे जाने कब मिलना होगा। अब चलते हैं। मुझे भूलना मत ईश्वर चाहेगा तो पुन: मिलेंगे। मेरे न रहने का दुख मत करना। आशा करता हूँ सभी वृक्षों के साथ तुम भी फलते-फूलते रहोगे।'*  ...

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